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सरकार ने किए कई दवाओं कीमतों में बदलाव, ये 78 दवाएं हुई सस्ती

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सरकार ने किए कई दवाओं कीमतों में बदलाव, ये 78 दवाएं हुई सस्ती: भारत सरकार के फैसले के बाद देशभर में बिकने वाली करीब 78 दवाएं सस्ती हो गई है| इसमें कैंसर, मधुमेह और अस्थमा जैसी कई बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। मोदी सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमला होने वाली गैर-अनुसूचित 42 दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने का निर्णय लिया है| इसमें व्यापार मार्जिन 30 प्रतिशत पर नियत किया गया है| बुधवार को जारी किए गए ऑफिसियल बयान में इस बात की जानकारी दी गई है|

सरकार ने किए कई दवाओं कीमतों में बदलाव, ये 78 दवाएं हुई सस्ती

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कीमत नियंत्रण आदेश, 2013 के पैरा 19 के तहत जनहित में असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल कर कैंसर के इलाज में उपयोग गैर-अनुसूचित 42 कैंसर दवाओं को व्यापार मार्जिन युक्तिसंगत बनाकर मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने का फैसला किया है।

औषधि विभाग ने एक अधिसूचना में कहा, ‘इसके तहत सरकार 42 गैर-अनुसूचित दवाओं के व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत पर नियत करती है और विनिर्माताओं को उत्पाद की पहले बिक्री बिंदु के आधार पर खुदरा मूल्य तय करने को कहा गया है।’

एनपीपीए के पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार इससे 105 ब्रांड का एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) 85 प्रतिशत कम होगा। इससे ग्राहकों को 105 करोड़ रुपए की अच्छी-खासी बचत होने की उम्मीद है। फिलहाल अनुसूचित श्रेणी के तहत कैंसर के इलाज में उपयोग 57 दवाएं कीमत नियंत्रण के दायरे में हैं।

दूसरी तरफ एनपीपीए ने कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, अस्थमा, दर्द जैसी बीमारी के इलाज में प्रयोग होने वाली 36 दवाओं की कीमतें तय कर दी हैं। एक अधिसूचना में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने अधिसूचना में कहा कि उसने 22 दवाओं की खुदरा कीमतों को तय किया है और 14 की उच्च कीमतों को संशोधित किया है।

जिन दवाओं की कीमतों में बदलाव किया गया है, उसमें बुडेसोनाइड इनहेलेशन तथा जेंटामाइसिन इंजेक्शन शामिल हैं। जहां बुडेसोनाइड का उपयोग अस्थमा के इलाज में किया जाता है वहीं जेंटामाइसिन का उपयोग कीटाणुओं के संक्रमण के इलाज के लिये किया जाता है।

इसके अलावा जिन अन्य दवाओं के खुदरा दाम नियत किये गये हैं, उसमें ट्रास्टुजुमाब इंजेक्शन (कैंसर के इलाज में उपयोगी) तथा मेटफोरमिन के साथ ग्लिकलाजाइड टैबलेट (डायबिटीज टाइप 2 के इलाज के लिये) शामिल हैं। एनपीपीए औषधि (कीमत नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत अनुसूची एक के अंतर्गत आने वाली जरूरी दवाओं के खुदरा मूल्य को नियत करता है।