इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस 2019, इतिहास, थीम, महत्व

इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस 2019, इतिहास, थीम, महत्व

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इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस 2019, इतिहास, थीम, महत्व: 20 मार्च को दुनिया हर साल इंटरनेशनल हैप्पीनेस डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है| इस दिन को सेलिब्रेट करने का श्रेय संयुक्त राष्ट्र के विशेष सलाहकार रहे जेमी इलियन को जाता है| इस दिवस को मनाने पीछे का उद्देश्य इंसान के नजरिए में बदलाव लानाहै | इस दिवस को सेलिब्रेट करके दुनिया को इस बात का एहसास दिलाना है की केवल आर्थिक विकास करके खुश नहीं रहा जा सकता|

इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस 2019, इतिहास, थीम, महत्व

इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस 2019

इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस का महत्व

इस दिवस के नाम से ही जाहिर है की यह दिवस खुश रहने का दिन है| वैसे तो खुश रहने का कोई एक दिन नहीं होता लेकिन यह दिन इसलिए सेलिब्रेट किया जाता है की इंसान को इस बात का एहसास दिलाया जाए की जीवन में खुश रहना कितन जरुरी है? साल 2013 से संयुक्त राष्ट्र हर साल इस दिवस को सेलिब्रेट करता आ रहा है| जिसका एक मात्र मकसद दुनियाभर के लोगों को खुशी की कीमत से रूबरू करवाना है| यही नहीं यह दिवस दुनियाभर के देशों में समावेशी, न्यायोचित और संतुलित आर्थिक विकास की ज़रूरत पर बल देता है जिससे सतत तरक्की, गरीबी उन्मूलन और सभी की खुशहाली व सुख को सुनिश्चित किया जा सके|

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इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस 2019 थीम

हर साल इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस की एक स्पेशल थीम रखी जाती है| साल 2019 की थीम है- “Happier Together”. यानी कि “एकसाथ खुश “, इस थीम का मकसद उन चीज़ों की ओर ध्यान देना है जो हम में एक जैसी हैं बजाए उसके जो हमें आपस में बांटती हैं| हर कोई खुश रहना चाहता है और जब हम साथ होते हैं तब ज़िन्दगी ज़्यादा खुशहाल होती है|

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इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस इतिहास 

संयुक्त राष्ट्र की आम सभा ने 12 जुलाई 2012 को अपने प्रस्ताव 66/281 के तहत हर साल 20 मार्च को इंटरनेशनल डे ऑफ़ हैप्पीनेस मनाने की घोषणा की थी| यह प्रस्ताव समाज सेवी, कार्यकर्ता और संयुक्त राष्ट्र के विशेष सलाहकार रहे जेमी इलियन की कोशिश का नतीजा था| उन्होंने ही इस दिवस की अवधारणा और रूप रेखा बनाई| उनका उदेश्य एक ऐसा प्रस्ताव लाना था जो ख़ुशी की तलाश को मानवीय अधिकारों और बुनियादी लक्ष्य में शामिल कर सके| जेमी इलियन ने जब इंटरनेशनल डे ऑफ़ हैप्पीनेस का आइडिया दिया तब उन्हें संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन मुखिया बान की मून का काफी समर्थन मिला था| यही नहीं यूएन के सभी 193 देशों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में जा भी देर नहीं की| इस प्रस्ताव को भूटान ने पेश किया| आपको बता दें कि भूटान एक ऐसा देश है जो 1970 से ही राष्ट्रीय आय की तुलना में राष्ट्र की खुशहाली को तवज्जो देता आया है|