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नागरिकता संशोधन बिल क्या है? CAB के फायदे और नुकसान, CAA विरोध का कारण

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नागरिकता संशोधन बिल क्या है? CAB फायदे और नुकसान, CAA विरोध का कारण: नागरिकता संसोधन बिल क्या है? जिसे केंद्र की मोदी सरकार लोकसभा में पास करवाने में सफल रही है। नागरिकता संसोधन बिल के बारे में आप सभी पिछले कुछ दिनों ने न्यूज़ में काफी कुछ सुन रहे होंगे लेकिन आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे की नागरिकता संसोधन बिल क्या है? इसके क्या फायदे या फिर क्या नुकसान होंगे? नागरिकता संसोधन बिल जो पहले से ही लागू है उसमें केंद्र सरकार काफी बड़े पैमाने पर बदलाव करने जा रही है। इस बिल में संसोधन होने के बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों के लिए बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत की नागरिकता लेने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस बिल का पूर्वोत्तर के राज्य कड़ा विरोध कर रहे है। पूर्वोत्तर के लोग इस बिल को राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत से खिलवाड़ बता रहे हैं।

नागरिकता संशोधन बिल क्या है? इसके फायदे और नुकसान, विरोध का कारण
नागरिकता संशोधन बिल क्या है? इसके फायदे और नुकसान, विरोध का कारण

नागरिकता संशोधन बिल क्या है?

नागरिकता संसोधन बिल जो संसद में पेश किया गया है वह नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है। इस संसोधन के हो जाने से नागरिकता प्रदान करने से सम्बंधित नियम में बदलाव हो जाएगा। नागरिकता बिल में बदलाव होने से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को बिना किसी वैध कागज के भारत की नागरिकता मिलने में काफी आसानी होगी।

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What is CAB?

वर्तमान समय में भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए भारत में 11 साल रहना जरुरी है। लेकिन नागरिकता संसोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान किया गया है।

नागरिकता संशोधन किसे मिलेगा फायदा?

– नागरिकता संशोधन बिल के पास होने का फायदा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को मिलेगा। वह भारत की नागरिकता लेने के योग्य हो जाएंगे।

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– इसके अलावा इन तीन देशों के सभी छह धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता पाने के नियम में भी छूट दी जाएगी। ऐसे सभी प्रवासी जो छह साल से भारत में रह रहे होंगे, उन्हें यहां की नागरिकता मिल सकेगी। पहले यह समय सीमा 11 साल थी।

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नागरिकता संशोधन पर विवाद क्यों है?

इस विधेयक में गैरकानूनी प्रवासियों के लिए नागरिकता पाने का आधार उनके धर्म को बनाया गया है। इसी प्रस्ताव पर विवाद छिड़ा है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा, जिसमें समानता के अधिकार की बात कही गई है।
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नागरिकता अधिनियम 1995 क्या है?

भारतीय संविधान की धारा 9 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने मन से किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है तो वह भारतीय नागरिक नहीं रह जाता है:
  • जनवरी 26, 1950 से लेकर दिसम्बर 10, 1992 की अवधि में विदेश में जन्मा हुआ व्यक्ति भारत का नागरिक तभी हो सकता है यदि उसका पिता उसके जन्म के समय भारत का नागरिक रहा हो।
  • जो व्यक्ति दिसंबर 3, 2004 के बाद विदेश में जन्मा हो, उसे भारत का नागरिक तभी माना जाएगा यदि जन्म के एक वर्ष के अंदर उसके जन्म का पंजीकरण किसी भारतीय वाणिज्य दूतावास (consulate) में कर लिया गया हो।
  • नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुभाग 8 के अनुसार यदि कोई वयस्क व्यक्ति घोषणा करके भारतीय नागरिकता त्याग देता है तो वह भारत का नागरिक नहीं रह जाता है।
  • मूल अधिनियम के अनुसार, अवैध आव्रजक वह व्यक्ति है जोबिना मान्य पासपोर्ट के भारत में प्रवेश करता है और वीजा की अवधि के समाप्त हो जाने पर भी इस देश में रह जाता है। इसके अतिरिक्त वह व्यक्ति भी अवैध आव्रजक माना जाता है जिसने आव्रजन प्रक्रिया के लिए नकली कागजात जमा किये हों।

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