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निर्भया केस: दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुर्नविचार याचिका, फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की

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निर्भया केस: दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुर्नविचार याचिका , फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की निर्भया केस के दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। बता दें की अक्षय सिंह को ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद इस सजा को दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है की वह फांसी की सजा पर एक बार फिर से विचार करें। अदालत में दायर की गई पुर्नविचार याचिका में उसके देरी के लिए माफी भी मांगी है। निर्भया की बलात्कार और हत्या के दोषी अक्षय सिंह ने अपनी पुर्नविचार याचिका में जो दलील दी है वह काफी अजीब है।

निर्भया केस: दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम में दाखिल की पुर्नविचार, फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की
निर्भया केस: दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुर्नविचार याचिका , फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की

इस पुनर्विचार याचिका में अक्षय ने दलील दी है कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है. दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है. साथ ही यहां का पानी भी जहरीला हो चुका है. ऐसे में जब खराब हवा और पानी के चलते उम्र पहले से ही कम से कम होती जा रही है फिर फांसी की सजा की जरूरत क्यों है?

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अक्षय कुमार ने इस याचिका में वेद पुराण और उपनिषद में लोगों को हजारों साल तक जीने की बात कही है। अर्जी में कहा गया है की धार्मिक ग्रंथो के अनुसार सतयुग में लोग हजारों साल तक जीते थे। त्रेता युग में भी लोग हजारों सालों तक जीते थे, लेकिन कलयुग में आदमी 50 से 60 साल तक ही जीता है। काफी कम लोग ही जो इससे अधिक उम्र तक जी पाते हो। जब कोई व्यक्ति जीवन की कड़वी सच्चाई और विपरीत परिस्थितियों से गुजरता है तो वो एक लाश से बेहतर और कुछ नहीं होता.

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आपको बता दें की 9 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के तीन दोषियों की र्ट ने कहा था कि सारे मैटेरियल पर गौर करने के बाद हम पाते हैं कि पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है. याचिका में कोई मेरिट नहीं है.

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