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लाल किले का रखरखाव का ठेका निजी हाथों में दिए जाने से राजनीति गरमाई

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लाल किले का रखरखाव का ठेका निजी हाथों में दिए जाने से राजनीति गरमाई: लाल किले की जिम्मेदारी निजी हाथों में दिए जाने से एक न्य विवाद उठ खड़ा हुआ है| एडॉप्ट हेरिटेज प्रोजेक्ट को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है| कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूछा की केंद्र सरकार कैसे ऐतिहासिक इमारतो को उद्योगपतियों को सौंप सकती है? कांग्रेस पार्टी ने अपने ऑफिसियल ट्विटर अकॉउंट की मदद से मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा की अब सरकार कौन सी ऐतिहासिक इमारत को प्राइवेट कंपनी को देंगी? कांग्रेस ने इसके लिए संसद, लोक कल्याण मार्ग, सुप्रीम कोर्ट या इनमें से सभी को चुनने का ऑप्शन भी रखा| कांग्रेस के साथ-साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी सरकार के इस फैसले पर अपने ट्विटर अकॉउंट की मदद से निशाना साधा|

लाल किले का रखरखाव का ठेका निजी हाथों में दिए जाने से राजनीति गरमाई

बता दें की देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों में से एक लाल किले के रखरखाव का जिम्मा डालमिया ग्रुप को सौंपा गया है| कंपनी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि आर्कियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया, मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म और डालमिया भारत लिमिटेड ने दिल्ली स्थित लाल किला और कडापा के गंदीकोटा फोर्ट की जिम्मेदरी लेने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। डालमिया ग्रुप को 25 करोड़ रूपये में ये ठेका दिया गया है| इस ठेके को प्राप्त करने के लिए कंपनी का मुकाबला इंडिगो और जीएमआर ग्रुप से हुआ| आपको जानकारी दें दें की एडॉप्ट हेरिटेज प्रोजेक्ट के तहत 90 ज्यादा स्मारक गोद लेने के लिए उपलब्ध हैं।

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इस हिसाब से डालमिया ग्रुप सरकार के अडॉप्ट प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर करने वाली पहली कॉर्पोरेट संस्था बनी| ये ठेका डालमिया ग्रुप को 25 करोड़ रूपये में मिला है| इस ठेके के लिए डालमिया ग्रुप के साथ इंडिगो और जीएमआर ग्रुप ने भी अपनी रूचि दिखाई थी| इस प्रोजेक्ट के तहत 90 ऐसी इमारतें है जिन्हे रखरखाव के लिए गोद लिया जा सकता है|

अब कंपनी 30 दिनों एक अंदर लाल किले के अंदर काम शुरू कर देगी और आगामी 5 साल के लिए लाल किले के रखरखाव की सारी जिम्मेदारी मिल गई है| शिवसेना ने केंद्र सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा की ये काफी शर्मनाक है, ऐसी नौबत आ गई है की हम अपनी ऐतिहासिक धरोहर की रखरखाव तक नहीं पर पा रहे है| शिवसेना ने केंद्र सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की नसीहत दी है|

बता दें की अब कंपनी का काम 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के सम्बोधन से पहले लाल किले के अंदर रात के समय में रोशनी को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी है| भारत की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों में से एकलाल किले की जिम्मेदारी को बखूबी निभाकर कंपनी अपने ब्रैंड को नई बुलंदियों तक ले जा सकती है|

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