पतंग शायरी | Patang Shayari

पतंग शायरी | Patang Shayari

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पतंग शायरी | Patang Shayari: स्वतंत्रता दिवस और मकर संक्रांति के अवसर पर देशभर के कई हिस्सों में पतंग उड़ाई जाती है| देश के अलग-अलग हिस्सों में पतंग को अलग-अलग त्यौहार पर उड़ाकर उस दिन को अच्छे से सेलिब्रेट किया जाता है| आज हम आपके लिए पतंग शायरी की बेस्ट कलेक्शन शेयर कर रहे है| जिन्हें आप मकर संक्रांति और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने दोस्तों के साथ शेयर करें|

पतंग शायरी | Patang Shayari

पतंग शायरी

हर पतंग जानती है अंत में कचरे मे जाना है
लेकिन उसके पहले उसे आसमान छूकर दिखाना है

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कटी पतंग का रुख तो था मेरे घर की तरफ
मगर उसे भी लूट लिया ऊंचे मकान वालों ने

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बेटी शायरी | Beti Shayari

मोहब्बत एक कटी पतंग है साहब
गिरती वही है जिसकी छत बड़ी होती है

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सारी दुनिया भूला के रूह को मेरे संग कर दो
मेरे धागे से बंध जाओ खुद को पतंग कर दो

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डोर, चरखी, पतंग सब कुछ था
बस उसके घर की तरफ हवा न चली

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स्वागत शायरी | Best Swagat Shayari

पतंग कट भी जाए मेरी तो कोई परवाह नहीं
आरजू बस ये है की उसकी छत पर जा गिरे

मुझे मालूम है उड़ती पतंगों की रवायत
गले मिलकर गला काटू मैं वो मांझा नहीं

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ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली
मेरे दोस्त ज़रा सी हवा क्या लग गई हवा में उड़ने लगी

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