कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व

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कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व: कृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ी धूम-धाम से भगवान कृष्ण जी की पूजा अर्चना की जाती है और इस दिन हिन्दू में धर्म के लोग व्रत भी रखते है| जन्माष्टमी का त्यौहार पूरे देश में बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है| हिन्दू धर्म के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद यानि की भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था| हर साल कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इसके अनुसार मनाया जाता है और इस दिन पूजा अर्चन के लिए लोग शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, आदि के बारे में इंटरनेट पर सर्च करते है| इस साल जन्माष्टमी कब है? इसको लेकर थोड़ा संदेह है| आपको बता दें की जन्माष्टमी कल यानि की 2 अगस्त को है और आप कल ही जन्माष्टमी का व्रत करें|

कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि,महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी 2018

कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दुओं के प्रमुख त्यौहार में से एक है| ऐसी मान्यता है भगवन विष्णु जी ने धरती पर बढ़ते पाप को कम करे के लिए भगवान कृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था| भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को भारत के हर राज्य में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है| जन्माष्टमी के मौके पर गली-मोहल्लों, मंदिर, बाजार में एक अलग ही रौनक रहती है और सभी लोग भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी में मगन रहते है| इस दिन घर और मंदिर में लोग भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है|

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त:

जन्माष्टमी के दिन निशिता पूजा का समय : 23:57 से 00:43

मुहूर्त की अवधि: 45 मिनट

जन्माष्टमी में मध्यरात्रि का क्षण : 24:20+

3rd सितंबर को, पारण का समय : 20:05 के बाद

पारण के दिन अष्टमी तिथि के समाप्त होने का समय : 19:19

पारण के दिन रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने का समय : 20:05

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वैष्णव जन्माष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त:

वैष्णव जन्माष्टमी: 03 सितंबर 2018 को मनाई जाएगी.

वैष्णव जन्माष्टमी के लिये अगले दिन का पारण समय : 06:04 (सूर्योदय के बाद)

पारण के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएंगे.

दही हाण्डी का कार्यक्रम : 3rd, सितंबर को मनाया जाएगा.

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जन्माष्टमी का महत्व

भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जो त्योहार मनाया जाता है, उसे कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जानते हैं. अष्टमी के दिन कृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है. पौराणिक कहानियों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था. इसलिए भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी शुभ माना जाता है.

ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री कृष्ण की पूजा करने से सभी दुखों व शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति व प्रेम आता है. इस दिन अगर श्री कृष्ण प्रसन्न हो जाएं तो संतान संबंधित सभी विपदाएं दूर हो जाती हैं. श्री कृष्ण जातकों के सभी कष्टों को हर लेते हैं.