Home शायरी अपने घर पर कविता (Ghar Par Kavita) Sweet Home Poem in Hindi

अपने घर पर कविता (Ghar Par Kavita) Sweet Home Poem in Hindi

Ghar Par Kavita, Sweet Home Poem in Hindi: आज हम आपके लिए घर से जुड़ी एक खूबसूरत कविता लेकर आए हैं जो आपको बहुत पसंद आएगी। आज हम सब अपने घर में रह रहे हैं, इसीलिए हम आपके लिए घर से जुड़ी एक खूबसूरत कविता लेकर आए हैं। आप हमारी वेबसाइट पर हाथी और कोरोनवायरस जैसे अन्य विषयों से संबंधित कविताएँ भी आसानी से पढ़ सकते हैं। आप इन संग्रहों को आसानी से फेसबुक और व्हाट्सएप की मदद से भी साझा कर सकते हैं। तो दोस्तों बिना समय बर्बाद करते हुए चलते हैं घर से जुड़ी हमारी नई कविता पर जो आपको बहुत पसंद आएगी। इस कविता को ज्यादा से ज्यादा लाइक करें।

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Ghar Par Kavita

हम घर के महत्व को समझते हैं जब हमें शहरों में छोटे कमरे में शिफ्ट होना पड़ता है। शहरों में हम नए वातावरण के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। एक किराये के कमरे में हमें मकान मालिक के कई नियमों का पालन करना पड़ता है लेकिन हमारे घर में हम इतने नियमों और विनियमों के बिना स्वतंत्र रूप से रह सकते हैं। हमारे घर में हम अपनी भावनाओं और भावनाओं को बिना किसी झिझक के आसानी से साझा कर सकते हैं। शहर के कमरे में जब हम बीमार महसूस करते हैं तो हम अपने प्यारे परिवार और दोस्तों के बारे में सोचते हैं।

घर पूछता है

घर पूछता है,
अक्सर यह सवाल,
क्या जाना है तुमने,
कभी मेरा हाल?

या फिर समझ लिया,
ईंट, पत्थर, गारे का
बुत बेज़बान, मकबरे सा
जो हो दीदार-ए-आम!

पीढ़ियाँ दर पीढ़ियाँ,
जो चढ़ीं मेरी सीढ़ियाँ,
आज नहीं देखें कभी,
मेरे जर्जर हालात को।

बचपन की खेली थीं,
खूब मैंने अठ्ठखेलियाँ,
जवानी में भी,कान्हा संग
नाचीं थीं अनेक गोपियाँ।

दूल्हा बना, घोड़ी चढ़ा,
बारात में की कई मैंने मस्तियाँ,
मुँह दिखाई, फिर गोद भराई,
फिर से बचपन था मैं जिया।

पइयाँ पइयाँ तू चला,
फिर साइकिल का चक्का बढ़ा,
कार के नीचे कभी न,
तूने पांव था अपना धरा।

फिर समय का वहीं,
चक्का चला,
निरंतर आगे तू बढ़ा,
सपने किए साकार फिर,
न कभी तू पीछे मुड़ा।

मात-पिता जो हैं तेरे,
मन में अपने धीरज धरा,
तेरे नाम का दीया,
मेरे आंगन में सदा जला।

पर तू! क्या तुझे इसका,
भान है ज़रा।
यह न हो तेरे नाम का दीया,
बन जाए उनके अंतिम,
श्वास का दीया क्या है!

मैं तो हूँ केवल,
ईंट, पत्थर का एक ढांचा,
पर क्या नहीं है तुझे,
उनके प्रेम पर मान ज़रा सा?

कुछ तो दे ध्यान तू,
कर उनके प्रेम का मान तू,
आज, हाँ आज….

घर पूछता है,
यह सवाल,
क्या जाना है तुमने,
कभी मेरा हाल?
बोलो, कुछ तो बोलो,
क्या जाना है तुमने,
कभी मेरा हाल?

क्योंकि हमारे परिवार के सदस्य इस प्रकार की स्थिति में हमारी देखभाल ठीक से कर सकते हैं। अज्ञात व्यक्ति हमें केवल हमारी समस्याओं में सुझाव दे सकते हैं लेकिन हमारा परिवार हमें उचित समय पर उचित दवा दे सकता है। परिवार के लोग हमारी लंबी उम्र के लिए हमारे लिए प्रार्थना कर सकते हैं। कुछ लोग कुछ पैसे कमाने के लिए शहर में शिफ्ट हो गए और कुछ पैसे की वजह से अपने प्यारे घर और परिवार के सदस्यों को भूल गए। आज हम आपके लिए एक प्यारी सी कविता लेकर आए हैं और इस कविता का विषय है हमारा प्यारा घर।

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Sweet Home Poem in Hindi (Ghar Par Kavita)

घर गतिमान नहीं होता
स्थिर होता है

किंतु मेरा धर गतिमान है
स्थिर नहीं
परिवर्तंनशील है
इसका आकार – प्रकार
पीपल की छाया
सड़क की पटरी
रेलवे का प्लेट-फार्म
सड़क के किनारे पड़े पाइप
उजाड़ पडे पार्क
निर्जन बस-स्टाप
ठहरी हुई फुटपाथ
या फिर
रात के अन्धेरे में सूना पड़ा
अंतर्राजीय बस अड्डे का विशाल परिसर
ही मेरा घर है

ठिठुरती रात में
जब मुझे नींद नहीं आती
मेरी छाती पर
बने ये तुम्हारे महल
मेरी आँखों में शूल से चुभते हैं

ये चुभन अब और नहीं सही जाती
नहीं सही जाती हिमालय सी पीर
भूख-प्यास की

सुनो! तुम्हारे महलों में
मेरे खून से सनी ईंटें लगी हैं
हवाओं में अभी भी
मेरे पसीने की गंध बाकी है

बस! इतना समझ लो
और
इससे पहले कि मेरा सीना फट पड़
छोड दो मेरा शोषण
बन जाने दो मेरा घर।
****
तेजपाल सिंह ‘तेज’

हम आशा करते हैं दोस्तों कि आपको हमारे घर से संबंधित यह कविता पसंद आई होगी। अगर आप भी इस कविता को पढ़ते हैं तो लाइक, शेयर और कमेंट करें। आप नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स के माध्यम से हमारे साथ अपने घर के अनुभव को भी साझा कर सकते हैं। जय हिन्द। इसके अलावा आप नीचे दिए गए लिंक से कोरोनोवायरस से संबंधित कविता भी पढ़ सकते हैं।

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