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द्वारका गैंगवार: ऐसे एक दिल्ली पुलिस के आम कॉन्सटेबल से हीरो बन गए नरेश कुमार

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द्वारका गैंगवार: ऐसे एक दिल्ली पुलिस के आम कॉन्सटेबल से हीरो बन गए नरेश कुमार– दिल्ली के द्वारका में हुई गैंगवार की घटना ने दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल को आम से खास बना दिया है| दरअसल रविवार को पुलिस को सूचना मिली थी की दिल्ली के द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन के पास कुछ बदमाशों के बीच गोलीबारी हो रही है और इस घटना ने नरेशा कुमार को चंद मिनट में हीरो बना दिया| हर एक पुलिसकर्मी जिस चीज का सपना देखता है वह आज नरेशा कुमार के जीवन में घटित हुई और वह अचानक ही दिल्ली पुलिस के हीरो बन गए| दिल्ली पुलिस में 30 साल की सर्विस कर चुके 55 साल के कांस्टेबल नरेश कुमार की जिंदगी में ऐसा कोई वाक्या नहीं था जिसे वे याद कर किसी को सुना पाते लेकिन रविवार को जो वाक्या हुआ उसे वह जिंदगी भर नहीं भूलेंगे|

dwarka gangwar in delhi

एएसआई प्रेम सिंह की टीम के सदस्य नरेश कुमार और उनके साथियों ने दो अपराधियों की दुश्मनी के चलते हुई गैंगवार में कई हथियारबंद अपराधियों की गोलीबारी का दिलेरी से जवाब दिया| भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई गैंगवार में आम जन को काफी नुकसान पहुँच सकता था| दोपहर लगभग 3 बजे द्वारका मेट्रो स्टेशन के पास अचानक शुरू हुई गैंगवार से मौके पर मौजूद लोग, दुकानदार, ठेलेवाले सभी के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया। एक आदमी चिल्लाने लगा, ‘ लगता है आतंकवादी हमला हुआ है’, जिसके बाद स्थिति बद से बद्तर होने लगी। मैं पास के गली में छिप गया। लगातार लोगों के चिल्लाने की और गोलियों के चलने की आवाज आ रही थी।

एक चश्मदीद ने नाम नहीं उजागर करने की शर्म पर बताया की ‘अगर पुलिस समय पर नहीं आती तो ये लोग कुछ भी कर सकते थे। मैंने अपनी जिंदगी में इससे पहले ऐसा कुछ नहीं देखा। जिस कार पर गोलियां चलीं उस कार की पूरी विंडस्क्रीन गोलियों से भून दी गई थी, मैंने गिनने पर पाया कि कार पर 14 गोलियां चलाईं गई थीं।’

गोलियों की आवाज सुनकर पास में खड़ी पीसीआर मौके पर पहुँची। बदमाशों को रोकने के लिए पीसीआर में तैनात कॉन्स्टेबल नरेश ने फायरिंग कर रहे लोगों को आवाज देकर ललकारा। कॉन्सटेबल नरेश एक पिलर के पीछे छिप गए और वहां से अपराधियों पर गोली चलाने लगे। सूत्रों ने बताया कि नरेश कुमार ने 3 गोलियां दागी जो आपराधिक गैंग के सदस्य विकास दलाल की गर्दन, चेहरे और हाथ में जा लगी। पुलिस को देखकर इन लोगों ने पुलिस पर भी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों गाड़ियों में बदमाशों की संख्या करीब 6 से 7 थी। दोनों एक दूसरे पर गोली चला रहे थे।

द्वारका गैंगवॉर में मारे गए गैंगस्टर में एक मंजीत महाल गैंग का दायां हाथ प्रवीण गहलोत और दूसरा बदमाश विकास दलाल था। विकास दलाल पहले मंजीत महाल गैंग के लिए ही काम करता था, लेकिन बाद में वह किसी वजह से इस गैंग से अलग हो गया और तभी से दोनों के बीच दुश्मनी थी। रविवार को विकास को यह पता चला कि प्रवीण द्वारका आने वाला है तभी उसने प्रवीण को मारने का प्लान बनाया। वह अपने साथ 3 से 4 बदमाशों को लाया था। पहले उसने प्रवीण की गाड़ी पर एक दर्जन से अधिक गोलियां चलाईं फिर बाद में गाड़ी से उतरकर प्रवीण की गाड़ी पर फायरिंग की थी। पुलिस को आता देख उसने भागने की कोशिश की लेकिन कॉन्सटेबल नरेश की गोली उसे लग गई और वो वहीं ढेर हो गया।

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