Home त्यौहार शुभ दिवाली रंगबिरंगी कलरफुल फ्लावर्स रंगोली डिजाईन चित्र फोटो इमेज

शुभ दिवाली रंगबिरंगी कलरफुल फ्लावर्स रंगोली डिजाईन चित्र फोटो इमेज

शुभ दिवाली रंगबिरंगी कलरफुल फ्लावर्स रंगोली डिजाईन चित्र फोटो इमेजरंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला में से एक है। अलग अलग प्रदेशों में रंगोली के नाम और उसकी शैली में भिन्नता हो सकती है लेकिन इसके पीछे भावना और संस्कृति में पूर्ण रूप से समानता है। इसकी यही विशेषता इसे विविधता देती है और इसके विभिन्न चरणों को भी प्रदर्शित करती है। इसे सामान्यतः त्योहार, व्रत, पूजा, उत्सव विवाह आदि शुभ अवसरों पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है। इसमें साधारण ज्यामितिक आकार हो सकते हैं या फिर देवी देवताओं की आकृतियाँ। इनका प्रयोजन सजावट और सुमंगल है। इन्हें प्रायः घर की महिलाएँ बनाती हैं।

रंगोली का इतिहास

रंगोली को अल्पना के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ तक की पौराणिक सभ्यताओं में भी इनके चित्र पाए गए हैं जो कि इस बात का प्रमाण हैं की उस ज़माने में भी लोग रंगोली बनाया करते थे। ‘अल्पना’ शब्द संस्कृत के – ‘ओलंपेन’ शब्द से जन्मा है, ओलंपेन का मतलब होता है – लेप करना। प्राचीन काल में लोगों का ये विश्वास था कि ये कलात्मक चित्र शहर व गाँवों को धन-धान्य से परिपूर्ण रखने में समर्थ होते है और अपने जादुई प्रभाव से संपत्ति को सुरक्षित रखते हैं। इसी दृष्टिकोण से अल्पना कला का धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर प्रचलन हुआ।

आखिर क्यों बनाते हैं रंगोलियाँ ?

रंगोली बनाना धार्मिक, सांस्कृतिक आस्थाओं का प्रतीक है। यह आध्यात्मिक प्रक्रिया का एक हम अंग है। तभी तो विभिन्न हवनों एवं यज्ञों में ‘वेदी’ का निर्माण करते समय भी माँडने बनाए जाते हैं। ग्रामीण अंचलों में घर-आँगन बुहारकर लीपने के बाद रंगोली बनाने का रिवाज आज भी विद्यमान है। इसे बनाने के पीछे के दो कारण है पहला भूमि शुद्धिकरण एवं समृद्धि। यह जानते हुए भी कि यह रंगोली कल धुल जाएगी, जिस प्रयोजन से की जाती है, वह हो जाने की कामना ही सबसे बड़ी है। त्योहारों के अतिरिक्त घर-परिवार में अन्य कोई मांगलिक अवसरों पर या यूँ कहें कि रंगोली सजाने की कला अब सिर्फ पूजागृह तक सीमित नहीं रह गई है।

शुभ दिवाली रंगबिरंगी रंगोली डिजाईन

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शुभ दीपावली कलरफुल रंगोली डिजाईन

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रंगोली के प्रकार ?

रंगोली दो प्रकार की होती हैं। सूखी और गीली। दोनों में एक फ्रीस्टाइल तकनीक से और दूसरी बिंदुओं को जोड़कर बनाई जाती है। बिंदुओं को जोड़कर बनाई जाने वाली रंगोली के लिए पहले सफेद रंग से जमीन पर किसी विशेष आकार में निश्चित बिंदु बनाए जाते हैं फिर उन बिंदुओं को मिलाते हुए एक सुंदर आकृति आकार ले लेती है।

रंगों का इस्तेमाल हुए सुन्दर रंगोली बनाना बेहद ही मुश्किल काम है इसलिए बाज़ारों में अब रंगोली डिजाईन के स्टीकर भी मिलने लगे हैं। जिसमें मेहनत करने का कोई काम ही नहीं है बस आपको उस स्टीकर को जमीन पर अपनी मनचाही जगह पर लगा देना है बस तैयार हो गयी आपकी रंगोली।

पौराणिक कथा

रंगोली के संबंध में पुराणों में कई कथाएँ प्रचलित हैं। चित्रकला पर पहले भारतीय ग्रंथ ‘चित्र लक्षण’ में एक कथा का उल्लेख आता है, वह इस प्रकार है- एक राजा के पुरोहित का बेटा मर गया। ब्रह्मा ने राजा से कहा कि वह लड़के का रेखाचित्र ज़मीन पर बना दे ताकि उस में जान डाली जा सके। राजा ने ज़मीन पर कुछ रेखाएँ खींचीं, यहीं से अल्पना या रंगोली की शुरुआत हुई। इसी सन्दर्भ में एक और कथा है कि ब्रह्मा ने सृजन के उन्माद में आम के पेड़ का रस निकाल कर उसी से ज़मीन पर एक स्त्री की आकृति बनाई। उस स्त्री का सौंदर्य अप्सराओं को मात देने वाला था, बाद में वह स्त्री उर्वशी कहलाई। ब्रह्मा द्वारा खींचीं गई यह आकृति रंगोली का प्रथम रूप है।

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