देव उठानी एकादशी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, महत्व

देव उठानी एकादशी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, महत्व

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देव उठानी एकादशी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, महत्व हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) , देवोत्थान एकादशी (Devutthana Ekadashi) और तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) का विशेष महत्व है| हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान श्री कृष्ण चार महीने तक विश्राम करने के बाद आज ही के दिन जागते है, भगवान श्री कृष्ण के जागने देवउठनी एकादशी कहा जाता है| इसी दिन भगवान विष्‍णु शालीग्राम रूप में तुलसी से विवाह करते हैं. देवउठनी एकादशी के दिन से ही सभी प्रकार के मंगल कार्य की शुरुआत हो जाती है| देवउठनी दिन के दिन पूजा पाठ भी किया जाता है| यहाँ जानिए देवउठनी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और महत्व के बारे में|

देव उठानी एकादशी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, महत्व

देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह कब है?

देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह का पर्व हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर साल कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है| इंग्लिश कैलेंडर के मुताबिक यह त्यौहार हर साल नवंबर महीने में मनाया जाता है| इस साल देवउठनी या तुलसी विवाह का पर्व 19 नवंबर को मनाया जाएगा|

जानिए! देवउठनी एकादशी का क्या महत्व है?

देवउठनी का पर्व हिन्दू धर्म के लोगों के लिए एक विशेष महत्व रखता है| देवउठनी के दिन से सभी प्रकार के शुभ कार्य की शुरुआत हो जाती है| शादी जैसे शुभ कार्य देवउठनी के दिन से शुरू हो जाते है और देवउठनी के दिन शादी को हिन्दू धर्म में काफी शुभ माना जाता है| ऐसी मान्यता है की देवउठनी के दिन ही भगवान श्री विष्णु अपने विश्राम को खत्म करके जागते है| भगवान विष्णु के जागने के बाद उन्हें सबसे तुलसी खिलाई जाती है| ऐसी मान्यता है की इस दिन भगवान विष्णु की व्रत कथा सुनने से 100 गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है| इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है| इस व्रत रखना भी शुभ माना जाता है|

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देवउठनी एकादशी पूजा विधि (Dev Uthani Ekadashi Ki Puja Vidhi)
1. देवुत्थान एकादशी के दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए.
2. नहाने के बाद सूर्योदय होते ही भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें.
3. भगवान विष्णु को बेल पत्र, शमी पत्र और तुलसी चढ़ाएं.
4. पूरे दिन भूखे रहने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करके व्रत खोलना चाहिए.
5. मान्यता है कि देवउठनी के दिन सोना नहीं चाहिए, इसीलिए इस रात लोग सोते नहीं हैं. बल्कि भजन-कीर्तन कर भगवान विष्णु का नाम लेते हैं.

देवउठनी एकादशी तिथि आरंभ और अंत (Dev Uthani Date and Time)
एकादशी तिथि का आरंभ – 18 नवंबर दोपहर 01:33 बजे से.
एकादशी तिथि की समाप्ति – 19 नवंबर दोपहर 02: 29 बजे तक.