आईआईटी बॉम्बे 56वें दीक्षांत समारोह: पीएम बोले- आईआईटी आज इंडियाज इंस्ट्रूमेंट और...

आईआईटी बॉम्बे 56वें दीक्षांत समारोह: पीएम बोले- आईआईटी आज इंडियाज इंस्ट्रूमेंट और ट्रांसफोर्मेशन बन गए हैं

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आईआईटी बॉम्बे 56वें दीक्षांत समारोह: पीएम बोले- आईआईटी आज इंडियाज इंस्ट्रूमेंट और ट्रांसफोर्मेशन बन गए हैं पीएम नरेंद्र मोदी आज 11 अगस्त को आयोजित हुए आईआईटी बॉम्बे के 56वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए और उन्होंने कैंपस से डिग्री पाने वाले देश-विदेश के छात्रों को बधाई भी दी| उन्होंने कहा की स्टार्ट-अप की क्रांति की ओर भारत बढ़ रहा है उसका एक बड़ा हिस्सा आईआईटी से है| यहाँ से निकलने वाले स्टूडेंट्स देश के विकास में अपना योगदान दे रहे है| छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक हज़ार करोड़ रूपये की आर्थक मदद का ऐलान भी किया| जिसकी मदद से इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता मिलेगी| उन्होंने आगे कहा की पिछले 6 दशकों की मेहनत का ही परिणाम है की आज आईआईटी बॉम्बे ने देश के चुनिंदा Institutions of Eminence में सफल रही है|

आईआईटी बॉम्बे 56वें दीक्षांत समारोह: पीएम बोले- आईआईटी आज इंडियाज इंस्ट्रूमेंट और ट्रांसफोर्मेशन बन गए हैं

आईआईटी बॉम्बे 56वें दीक्षांत समारोह

– प्रधानमंत्री ने का की आईआईटी ने दुनियाभर में भारत का ब्रांड बनाया है|

– आईआईटी के स्टूडेंट के कुछ स्टार्टअप भारत काफी सफल रहे है| जिनसे कई लोगों को रोजगार मिल रहा है|

– दीक्षांत समारोह के दौरान पीएम ने कहा की अच्छे आइडिया सरकारी इमारतों से नहीं बल्कि युवाओं के दिमाग से निकलकर आते है|

– आईआईटी ने देश में कई इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की दिशा दी जो वैश्विक स्टार पर एक ब्रांड के रूप में उभरे है|

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– पीएम ने कहा की- IIT को भारत और दुनिया इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रूप में पहचानती है, लेकिन आज हमारे लिए इसकी परिभाषा बदल चुकी है| यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई से जुड़े स्थान भर नहीं रह गए हैं, बल्कि IIT आज इंडियाज़ इंस्ट्रूमेंट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन के रूप में पहचाना जाने लगा है|

– उन्होंने कहा की आज मैं आपके चेहरे पर जो मुस्कान और उत्साह की झलक देकर लगता है की अब हम सही दिशा में जा रहा है| आईआईटी से निकलने वाले तमाम स्टूडेंट्स देश के विकास में अपना योगदान दे रहे है|

– पीएम ने कहा की यहाँ के स्टूडेंट्स भारत की विविधता को बयां कर रहे है|

प्रधानमंत्री ने कहा की अविष्कार 21 वीं शताब्दी का गूढ़ शब्द है| जो समाज अविष्कार नहीं करता, वह वही रुक जाएगा| भारत स्टार्टअप का केंद्र बनता जा रहा है| यह अविष्कार की भूख को दर्शा रहा है|