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अमेरिका थिंक टैंक : तनाव कम करना सिर्फ पकिस्तान के हाथ में

अमेरिका थिंक टैंक : तनाव कम करना सिर्फ पकिस्तान के हाथ मेंएक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक ने कहा है कि आतंकवादियों को गिरफ्तार करने, उनके प्रशिक्षण शिविर बंद करने सहित अन्य अहम कदम उठाना पाकिस्तान पर निर्भर है ताकि तनाव दूर हो सके क्योंकि भारत 18 सैनिकों की जान लेने वाले उरी आतंकी हमले का जवाब देने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।

KASHMIR, INDIA - DECEMBER 05: Smoke rises from a bunker as Indian Army soldiers search for suspected militants after an attack on their base at Mohra, in Kashmir, India on December 05, 2014. Militants sneaked into an Indian army camp in Kashmir on Friday morning killing at least ten soldiers and police in their bunkers, the worst losses for security forces in more than a year.  (Photo by Ahmer Khan/Anadolu Agency/Getty Images)

‘‘द हैरिटेज फाउंडेशन’’ की लीजा कर्टिस ने कल कहा, ‘ आतंकवाद को ख़त्म करना अब पूरी तरह से पकिस्तान पर निर्भर करता है। आतंकी नेताओं की गिरफ्तारी और उनके प्रशिक्षण केंद्र बंद करना ऐसे थोड़ कदम पकिस्तान उठा सकता है ताकि वे इस बात को साफ़ कर सके की जो आतंकी हमले हो रहे हैं पकिस्तान उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए बहुत ही गंभीर है ‘ उनका था अगर भारत की तरफ से किसी भी तरह की सैन्ये कार्रवाई होती है तो pok में स्थित आतंकी कैंप निशाना बनेंगे ऐसे हालातों में युद्ध के छिड़ने की पूरी संभावना होगी।

उन्होंने ये भी कहा की भारत आपने आप को सारे विश्व के आगे एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में दिखाना चाहता है। ऐसे में पकिस्तान जैसे देश से टकराने पर होने वाले परिणामों को सोचना होगा। 2008 में हुए मुम्बई आंतकी हमले की जिम्मेदारी पकिस्तान ने ली थी, और यह बहुत ही शर्म की बात है पाकिसान अपने ही देश में उन आतंकियों के खिलाफ मुकदमा चलने के लिए नाकाम रहा है। इस बीच द वाल स्ट्रीट जर्नल के एक रेपोटर ने अपनी डॉक्यूमेंट्री में ये साफ़ साफ़ दिखाया था, की किस तरह पाकिस्तान में टेरर कैंप बेख़ौफ़ चल रहे हैं।

‘द वाल स्ट्रीट’ के अनुसार, पाकिस्तानी प्राधिकारियों का कहना है कि इस प्रांत में आतंकवादियों का कोई सुरक्षित ठिकाना ही नहीं है। रविवार को उत्तर कश्मीर के उरी शहर में सशस्त्र आतंकवादियों ने सेना की एक बटालियन के मुख्यालय पर हमला किया जिसमें 18 जवान शहीद हो गए और दर्जन भर से अधिक घायल हो गए। इस हमले में शामिल चारों आतंकियों को सेना ने मार गिराया।