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13 अक्टूबर को मेरठ किसान अधिकार आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है!

मेरठ,13 अक्टूबर, 2016: भारत एक ऐसा देश है जहां दस में से सात किसान हैं, लेकिन फिर भी  उनकी स्थिति बेहद दयनीय है। यह तथ्य भी हैरान करने वाला है की आजादी के 70 सालों बाद भी किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर है; जो देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। इनकी समस्याओं को  पेश करने और किसानों के अधिकारों की आवाज़ उठाने के लिए 13 अक्टूबर को मेरठ में सामूहिक स्तर पर किसान अधिकार आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसमें  किसान और किसान संघ के नेताओं जो  दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से सम्बन्ध रखते है और वर्तमान में  पिछले कुछ  महीनों से राज्य में जो कुछ भी  चल रहा है उससे आहात है और सपा सरकार ने जो वादे 2012 के  चुनाव से पहले किया था उसे पूरा करने के लिए सरकार के समझ अपनी बात रखना चाहते है!

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मेरठ इस ऐतिहासिक आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है। इस आंदोलन के लिए चौधरी चरण सिंह पार्क, कमिश्नरी चौक को चुना गया है! इस आंदोलन के दो प्रमुख नेताओं- नरेंद्र राना,जो इस जन आंदोलन के सूचना चालक की भूमिका निभा रहे है और राम कुमार अत्री जो आचार्य रामस्वरूप पंडित जी (जैविक  भरत के अध्यक्ष) से मार्गदर्शन में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहे है!

राम कुमार अत्री ने कहा, “1858  में; किसानों और सैनिको ने  मंगल पांडे के नेतृत्व में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में  मेरठ से दिल्ली के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का आह्वान किया था। अब, समय गया है की एक बार फिर किसान  इस ऐतिहासिक जगह पर एकजुट हो और अपने  अधिकारों की की लड़ाई लड़े और सरकार तक अपनी आवाज पहुचाएं “।

इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड और हरियाणा से कई किसान नेताओं ने अपना समर्थन देने का आह्ववान किया है। इसमें किसानों और आम लोगों की एक विशाल सभा खेती और किसानों के अधिकारों से संबंधित समस्याओं के लिए आवाज़ उठाने  के लिए एकजुट होगी!

मुख्या एजेंडा और आंदोलन के मुद्दे:

  1. कश्मीर के उरी हमले में जवान शहीदों को सामूहिक श्रद्धांजलि दी जाएगी । सभी किसान नेताओं, किसान संघ के सदस्यों,किसान संघ के नेताओं और सामान्य लोगों को अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

२. किसानों जो कर्जे  में डूबकर कर आत्महत्या करने के लिए मजबूर है फिर भी उन से जबरन वसूली का मुद्दा उठाया जायेगा।

  1. किसान संघों के सदस्यों जो आंदोलन के समर्थन में हैं उनका संगठन बनाया जाएगा।
  2. किसानों के इस जन आंदोलन के लिए एक शासकीय संगठन के गठन का निर्णय लिया जाएगा।

अनुसूचित कार्यक्रम: 12:00 बजे- कमिश्नरी चौक  पर लोगो का एकजुट होना आरम्भ हो जाएगा। 1:00 बजे के आसपास, किसानों और उनके नेताओं द्वारा उपवास और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन का  आरम्भ किया जाएगा जो अनिश्चितकालीन में भी तब्दील हो सकता है अगर सरकार उनके मांगों को नही मानती है!

नरेंद्र राना के अनुसार, “हम किसानों की मांगों को उठाने के लिए शांतिपूर्ण तरीकों के पक्ष में हैं, लेकिन अगर सरकार हमारी मांगों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं होती है तो  हम अनिश्चितकालीन अनशन पर जाने के लिए मजबूर हो जाएगे।

सभी लोग हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती या खेती से जुड़ी अन्य किसी भी प्रकार के रोजगार पर निर्भर  हैं; और जो किसानों का  समर्थन करते हैं इस जन आंदोलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित हैं।