दिल्ली जल बोर्ड का आदेश 3000 करोड़ का बिल का भुगतान करे...

दिल्ली जल बोर्ड का आदेश 3000 करोड़ का बिल का भुगतान करे सरकारी दफ्तर वरना पानी नहीं मिलेगा|

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दिल्ली जल बोर्ड इ पानी के बकाया बिल के भुगतान ना करने वाले दफ्तरों को कड़ी कार्यवाही की चेतावनी दी है| दिल्ली जल बोर्ड ने बताया के सरकारी दफ्तरों पर 3000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का बिल बकाया है, बोर्ड ने साफ शब्दों में सरकारी दफ्तरों बकाया भुगतान ना करने की ऐवज में पानी की सप्लाई बंद की चेतावनी दी| बता दें की दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जल बोर्ड के प्रमुख है और बोर्ड की चेतावनी पर राजनीति शुरू हो गई| जल बोर्ड के अधिकारी ने बताया की जिन दफ्तरों पर बिल बकाया है उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है|

दिल्ली जल बोर्ड का आदेश 3000 करोड़ का बिल का भुगतान करे सरकारी दफ्तर वरना पानी नहीं मिलेगा|
मिली जानकारी के अनुसार अलग अलग 7 सरकारी विभागों पर कुल 3,220.12 करोड़ रुपये बिल बकाया है| जल बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया की अकेले भारतीय रेलवे पर 1,577.32 करोड़ रुपये का बकाया है| दिल्ली की तीनो नगर निगमों पर 1,100.26 करोड़ रुपये का बिल बकाया है| वही दिल्ली पुलिस पर 284 करोड़ और डीडीए पर लगभग 72 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। जल बोर्ड के अधिकारी ने आगे बताया की मूल बकाया 737.77 करोड़ रुपये के आस पास है| लम्बे समय से बिल का भुगतान ना करने के कारण अब यह बकाया 3000 करोड़ से ज्यादा का हो गया है| इसमें से कुछ विभागों ने काफी लम्बे समय से जल बोर्ड के बिल का भुगतान नहीं किया है| इस बकाया बिलो पर लेट फ़ीस लगने के कारण अब ये बकाया राशि बढ़ती ही जा रही है|

दिल्ली जल बोर्ड ने बिल का भुगतान ना करने वाले विभागों के पानी के कनेक्शन काटने की चेतावनी जारी की है| बिल भुगतान ना करने वाले विभागों में दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली विकास प्राधिकरण जैसे कई बड़े विभाग शामिल है|

उतरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारी ने बताया की दिल्ली जल बोर्ड के बकाया बिल का भुगतान करवाया जा रहा है| जल बोर्ड जिस बकाया बिल की बात कर रहा है वो पिछले कुछ समय पुराना है| उतरी नगर निगम ने दिल्ली जल बोर्ड की कार्यवाही को राजनीतिक फैसले बताया है| इस अधिकारी ने दिल्ली जल बोर्ड पर ये आरोप लगाया की जल बोर्ड सामाजिक संगठन से जुड़े विभागों से भी कमर्शियल दरों पर शुल्क वसूलता है| निगम के अधिकारी ने बिल का भुगतान न होने को एक बड़ा कारण बताया है और इसके भुगतान को लेकर हल निकला जा रहा है| दिल्ली जल बोर्ड ने अपने इस फैसले में किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप से मना किया है|