विश्व महिला दिवस 2018 निबंध, कविता, स्पीच पढ़े यहाँ-

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8 मार्च को महिला दिवस है और इस दिन दुनियाभर के स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों में इंटरनेशनल वूमेंस डे से जुड़े कई प्रोग्राम का आयोजन किया जाता है| इस दिन स्कूल, कॉलेज में निबंध, कविता आदि की प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है| इस दिन जो महिलाएँ किसी आयोजन में भाग लेने जा रही है, उन्हें वहाँ महिला दिवस से जुड़ा भाषण भी देना होता है| आप सभी की इन सभी जरुरतों को पूरा करने के लिए हम यह पोस्ट लिख रहे है| महिला दिवस पर विश्वभर में महिलाओं को सम्मान देने के लिए इंटरनेशनल वूमेंस डे मनाया जाता है| बता दें की इस दिन को मानाने के पीछे लिंग की समानता का सन्देश देना भी होता है|

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2018 कविता

दिलों में बस जाए वो मोहब्बत हूँ,
कभी बहिन, कभी ममता की मूरत हूँ।
मेरे आँचल में हैं से चाँद सितारे,
माँ के क़दमों में बसी एक जन्नत हूँ।
हर दर्द-ओ-ग़म को छुपा लिया सीने में,
लब पे ना आये कभी वो हसरत हूँ।
मेरे होने से ही है यह कायनात जवान,
ज़िन्दगी की बेहद हसीं हकीकत हूँ।
हर रूप रंग में ढल कर सवर जाऊं,
सब्र की मिसाल, हर रिश्ते की ताकत हूँ।
अपने हौसले से तक़दीर को बदल दूँ,
सुन ले ऐ दुनिया, हाँ मैं औरत हूँ।

*****

ये औरत तुझे क्या कहुँ, तेरी हर बात निराली है
तू एक ऐसा पौधा है जिस घर रहे
वह हरियाली ही हरियाली है
तेरी शान में सिर्फ इतना कह सकते है की
तेरी उचाईयो के सामने आसमान भी नहीं रह सकता है
मेरी सिर्फ इतना सा एक पैगाम है
ऐ औरत तुझे मेरा सिर झुका कर सलाम है

*****

नारी तुम प्रेम हो आस्था हो,विश्वास हो
टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो
हर जान का तुम्ही तो आधार हो
नफरत की दुनिया में मात्र तुम्ही प्यार हो
उठो आपने अस्तित्वा को सम्भालो
केवल एक दिन ही नहीं
हर दिन नारी दिवस बना लो

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विश्व महिला दिवस 2018 निबंध

माँ तू क्यों कभी थकती नही?
क्यों तू कभी अपने कर्मो से बचती नही?
तेरी थकान की पीड़ा,
क्यों मुझे होती है।
क्यों ऐसे बलिदान की शक्ति,
सिर्फ तुझ मे होती है।
संघर्ष तो हम सब भी करते है,
क्यों इतने काम के बावजूद भी,
हम तुझसे और उम्मीद करते है।
क्या इसलिए?
क्यूंकि तूने कभी किसी से कुछ कहा नही।
मानली हमेशा अपनो की बात,
जैसे होगा बस वही सही।

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ये किसने कहा की,
नारी कमज़ोर है।
आज भी उसके हाथ में,
अपने घर को चलाने की डोर है।
वो तो दफ्तर भी जाए,
घर भी संभाले।
ऐसे हाल में भी कर दे,
पति अपने बच्चो को भी उसके हवाले।
एक बार उस नारी की ज़िंदगी जीके तो देख,
अपने मर्द होने के घमंड,
में तू बस यू बड़ी बड़ी ना फेक.।
अब हौसला बन तू उस नारी का,
जिसने ज़ुल्म सहके भी तेरा साथ दिया।
तेरी ज़िम्मेदारियों का बोझ भी,
ख़ुशी से तेरे संग बाट लिया।
चाहती तो वो भी कह देती,
मुझसे नहीं होता।
उसके ऐसे कहने पर,
फिर तू ही अपने बोझ के तले रोता।

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